मिल के जी ले रे संगी
मिल के जी ले रे संगी,
खिल के जीले रे संगी
बढ़ के जी ले रे संगी,
पढ़ के जी ले रे संगी ।। टेक ।।
ज्ञान के सागर हैं वेद,
नारायण के घर हैं वेद।
पढ़ के जी ले रे संगी ।। १ ।।
सब के तें हर मीत बन,
सब के तैं हर हित कर।
हित के जी ले रे संगी ।। २ ।।










