भारत की पूँजी अंग्रेज ले गया, जाते-२
भारत की पूँजी अंग्रेज ले गया, जाते-२
देश को कंगाली दे गया।
बनकर मेहमान अँग्रेज यहाँ आया था.
चालाकी से अपना अधिकार
भी जमाया था,
मेहमान बेईमान घर का
मालिक बन गया।। जाते० ।।
धर्म और सभ्यता देश
की उजाड़ गया,
खान-पान रहन-सहन
लोगों का बिगाड़ गया,
अंग्रेजी रिवाज और ये फैशन
दे गया ।। जाते० ।।
हैट-पेण्ट पहने, डाले
टाई लटकाई है,
होठों पर शराब और
बीड़ी भी सजाई है,
फैशन के बहाव में है
भारत बह गया।। जाते० ।।
रोटी साग सब्जियों से
नफरत भी दिखाने लगे,
अण्डे-मीट-केक यहाँ
होटलों में खाने लगे,
‘खाओ-पीओ मौज’
की अँग्रेज कह गया।। जाते० ।।
‘नमस्ते’ व ‘जयराम जी’
करना छड़ाया है,
गुडमार्निंग गुडवाई उसने
सिखलाया है, धर्म का सिद्धान्त
तो पुस्तक में रह गया ।। जाते० ।।
गोरे अँग्रेज चले गये इंग्लैण्ड ठेठ,
किन्तु अब तो यहाँ काले
अँग्रेज अपटूडेट,
जहरीली शिक्षा का जमा
बीज रह गया।। जाते० ।।
स्वतन्त्र भारत में
सारे हो रहे उल्टे काज,
सच में बताओ क्या
इसी को कहते ‘रामराज’,
गाँधीजी के सपनों का
संसार ढह गया।। जाते० ।।










