दारू की बोतल रखता है
दारू की बोतल रखता है,
और पी के कुछ-कुछ बकता है।
मेरा पूत शराबी बना दिया।
इस गली में कई लफंगे हैं,
कुछ काणे हैं कुछ भंगे हैं।
कभी किसी से कभी किसी
से करते रहते दंगे हैं।
वो उनके पास बैठा करता फिर
पानी पिलाना सिखा दिया ।।१।।
जब घर में आकर बड़ता है
हम सब से खूब झगड़ता है।
गली में गिरता उल्टी करता
कोई बोले तो लड़ता है।
म्हारे किल्ले तीन धरती के थे
एक किल्ला पढ़ने बिठा दिया ।।२।।
बच्चे बेवारस फिरते हैं,
उस नीचे से फिर भी डरते हैं।
भूखे प्यासे तो रहते हैं,
सर्दी में जड़ाये मरते हैं।
‘रामरख’ ने हाल बुरा देखा,
घर वाली को भी सता दिया।।३।।










