है पुकारता स्वदेश जाग-जाग नौ जवान।

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है पुकारता स्वदेश जाग- जाग नौ जवान।

है पुकारता स्वदेश जाग-
जाग नौ जवान।
हो गया प्रभात काल नींद
त्याग नौ जवान।। है पुकारता….

बन शिवा प्रताप राम भीम
कृष्ण के समान,
याद कर के पूर्वजों की वीरता
व स्वाभिमान, शत्रुओं के रक्त से
तू खेल फाग नौ जवान।।
है पुकारता…

धांय-धांय कर समाज और
देश जल रहा,
देख पीड़ितों की आह का धुंआ
निकल रहा, लग रही है
देश भर में एक आग नौ जवान।।

है पुकारता है हमारे पूर्वजों की
जो पुनीत यादगार,
जिस पे प्राण दे गये हैं
देश भक्त बेशुमार,
हो न जाये नष्ट देश का वो भाग नौ जवान।।

है पुकारता उठ स्वराष्ट्र में
नवीनजोश की लहर चला,
बन महान आर्य वीर ज्योति
क्रान्ति की जला,
रूढ़ियों क्रीतियों से दूर भाग नौ जवान।।
है पुकारता…..

से प्रभो हमें स्वप्न में देश प्रेम भक्ति दो.
ध्येय से डिगें नहीं अतुल प्रबल शक्ति दो,
वर जो मांगना है तो वर ये मांग नौ जवान।।
है पुकारत…