हाँ देख न उसको पाया

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हाँ देख न उसको पाया

हाँ देख न उसको पाया,
मन मन्दिर में ही समाया।
तू रहता है जहां,
वो रहता है वहाँ,
कोई खोज न उसको पाया।।

१. विश्व रचता वही
तो पिता एक है-
एक है देख रचना
अजब बड़ी नेक है-
नेक है कैसी लीला
रच ही सभी,
गलती होती ना कभी
यह विधिवत जगत रचाया….

२. हर दिशा में ठोर
खाली नहीं-रे नहीं हर
तरह का कोई और
माली नहीं-रे नहीं
कोई साथी ना सगा.
खुद ही रहता है लगाफिर
क्यूं ना समझ में आया……

३. क्यूं फिरे तँ भटकता जगत
में अरे-ओ अरे कष्ट पाता
व्यर्था खर्च धन को करे-रे करे
कहाँ ढूढ़ता नादान,
उसका दूर ना मकान
वो व्यापक ब्रह्म कहलाया……….

४. तेल तिल में बसे
पुष्प में बांस है-बांस है।
इस तरह वो सभी
के रहे पास है पास है
उसको देखता कहाँ
वो तो रहता है यहाँ
हर कण-कण बीच समाया………