बर्बाद क्यों करी है तूने ये जवानी।
बर्बाद क्यों करी है तूने ये जवानी।
करता है नाश क्यों तू ऐ
नाश की निशानी ॥
विषयों में फंस रहा तू
फिर भी क्यों हंस रहा तू।
चक्की में दाना जैसे
वैसे ही पिस रहा तू।
मन की ही मानता है
ऋषियों की ना मानी
करता है नाश क्यों तू….।
फिरता है क्यों आवारा
गलियों में मारा-मारा।
आती न यह जवानी
जिन्दगी में फिर दोबारा।
जीवन ये जवानी है ओस जैसा
पानी करता है नाश क्यों तू….।
खाया कबाब तूने
पी ली शराब तूने।
कितना कमाया खोया
ना देखा हिसाब तूने।
जुआ व ताश खेला देखी न
लाभ-हानि करता है नाश क्यों तू…..










