ना रहे युवक ब्रह्मचारी
ना रहे युवक ब्रह्मचारी
लगी विषयों की बीमारी।
लगी विषयों की बीमारी क्या जिन्दगानी-ओऽऽऽ क्या
जिन्दगानी है देखो तो।
‘ताराचन्द’ तेरा गाना,
भूलों को राह दिखाना-अमर निशानी है….।
जब उम्र थी साल अठारह,
चेहरे पर बज गए बारह-क्या बिरानी है….।
बीसी के ओरे-धीरे,
दो पैदा कर लिए छोरे-तादाद
बढ़ानी है…..।
बाहर का तेल लगाया,
अन्दर का तेल गंवाया
कीनी बड़ी हानि है….।
देखे नित स्वांग सिनेमें,
कहे तर्ज नहीं भजनी में-रात गंवानी है…..










