कसम है नौजवानो तुम्हें नौजवानी की।

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कसम है नौजवानो तुम्हें नौजवानी की।

कसम है नौजवानो तुम्हें
नौजवानी की।
कसम है मातृभूमि की
गंगा के पानी की ॥

कितने ही धरती माँ
की गोद में सो गए,
कितने ही देश के लिए
शहीद हो गए।
कसम उन शहीदों की
हर माँ के लाल को,
चलने न देंगे देश में
दुश्मन की चाल को।
करनी है ‘पथिक’ रक्षा
हर हिन्दुस्तानी की
कसम है मातृभूमि को….।

इस जन्मभूमि पर न
कोई आँख उठाए,
माता की लाज को न
कोई लूटने पाए।
दे देना खून देश की
मिट्टी न देना तुम,
दुश्मन जो धरे पांव उसे
काट लेना तुम।
जिंदा रहेगी याद तुम्हारे
निशान की कसम है मातृभूमि की….।

चाहे नजर के सामने
चलती हों गोलियाँ,
मस्ती में चलें झूम के बन-
बनके टोलियाँ।
कंधे से कन्धा जोड़कर
दीवार बना लो,
कदम से कदम जोड़कर
रफ्तार बनालो।
मरना वतन पे मंजिल है
जिन्दगानी की कसम है मातृभूमि की….।