गोरखपुर की जेल में बैठा
गोरखपुर की जेल में बैठा
मां को लिखता परवाना।
देश धर्म का दीवाना।
सब माताओं की
माता है मेरी भारत माता।
उसकी आजादी की भेंट में
चढ़ने को मैं जाता।
जिसको प्यार नहीं माता
से उसका अच्छा मर जाना।
जन्मदात्री जननी मेरी ले
अन्तिम प्रणाम मेरा।
जन्म-जन्म तक ना भूलूंगा
मैं माता जी अहसान तेरा ॥
सेवा ना कर सका आपकी
यही मेरा है पछताना।
मेरी मौत का मेरी मां से
जब सन्देश सुनाए।
मेरी याद में तेरी आंख से
आंसू ना बह जाए।
वतन पे मरने वालों की
मां को ना चाहिए घबराना।










