अरे नौजवानो सम्भल करके चलना
अरे नौजवानो सम्भल करके चलना,
कदम ये तुम्हारे बहक न जाए।
भटकते-भटकते निकले
कहां को जीवन की नैया डूब न जाए ॥
प्राणी की सेवा बड़ा ये कर्म है,
अनमोल गहना ये सेवा धर्म है।
सेवा से ही अनेकों तरे हैं,
सेवा के कारण करते ही जाए….।
सभ्यता हमारी जो सबसे पुरानी,
कहीं बन न जाये कोरी कहानी।
एक बार पीछे मुड़ करके देखो,
संस्कृति हमारी कहीं खो न जाए….।
बल में सदा ही आगे रहें हम,
दूसरों की रक्षा करते गये हम।
याद करके फिर से हनुमान बली को,
शक्ति का सञ्चय करते ही जाए..।










