ओ३म् नाम प्यारा नाम गाए जा

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ओ३म् नाम प्यारा नाम गाए जा

ओ३म् नाम प्यारा नाम गाए जा
प्राणी बोल के प्राणी बोलके।
उसको मनाले प्रीति लगाले
अनमोल जीवन सफल बनाले।

1.जिसके जप से बुद्धि
विमल हो जाती है।
शंकाएं निर्मल सकल हो जाती
प्रतिपल-पल आनन्द
आन्तरिक होता है।
जिसके जप से मन
अतिहर्षित होता है।

जो अनुपम ब्रह्माण्ड की
रचना करता है।
जो प्रियतम प्राणी के
सकल दुःख हस्ता
देशभक्त प्रभुभक्त ही
जिसको प्यारा है।
दुर्बल-दुखिया दीन का
वही सहारा है

जिससे जगमग ज्योतिमान
नभमण्डल है।
जो अनुपम आनन्द
निष्कपट निश्चत है।
जीवों के कर्मों का
देता जो फल है।
निराकार निर्लेप
निरंजन निर्मल है

इधर-उधर-दर-बदर
भटकता क्यों नर है।
अणु-अणु, कण-कण में
व्यापक ईश्वर है।
‘बेगराज’ हर एक दिल में
प्रभु का घर है।

फिर किसका डर जब
रक्षक वो ईश्वर है।