जब दिल में बसा दिलदार मेरा

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जब दिल में बसा दिलदार मेरा

जब दिल में बसा दिलदार मेरा
तो
दिलदार को ढूंढ़न जाऊँ कहाँ।
कण-कण में रमा करतार मेरा
करतार को ढूंढ़न जाऊँ कहाँ ॥

जिस तार में वो करतार छिपा
‘बेमोल’ वो तार छिपा दिल में।
मेरा तो है भरतार वही भरतार को
ढूंढ़न जाऊँ कहाँ।

गुरु-माता-पिता-बन्धु व
सखा सारे जग का आधार वही।
मेरा तो है परिवार वही परिवार को
ढूंढन जाऊँ कहाँ।

दुनिया दो दिन का मेला है
इसमें सब कुछ बेगाना है।
जब सबका एक ठिकाना है
तो घरबार को ढूंढ़न जाऊँ कहाँ।

है निराकार वो परमेश्वर
जिसका कोई आकार नहीं।
मानव की तरह वो साकार नहीं
निराकार को ढूंढ़न जाऊँ कहाँ।