सोचा नहीं तूने कभी बैठकर अकेले में।
सोचा नहीं तूने कभी
बैठकर अकेले में।
कौन तेरा तूं है किसका
दुनियां के मेले में ॥
जीवन का उद्देश्य
यदि ‘प्रेमी’ नहीं जाना तूं।
हीरा जन्म लुटा दिया
कूदकर झमेले में….।
कौन साथ आया तेरे
कौन साथ जाएगा।
लाया था क्या ले जाएगा
डालकर के थैले में…..।
क्या किसी से लिया
तूने क्या किसी को दे दिया।
जीवन ही बर्बाद किया
इसी देने लेने में….।










