आदत बुरी सुधार लो

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आदत बुरी सुधार लो

आदत बुरी सुधार लो,
बस हो गया भजन।

आया कहाँ से कौन तू
जाएगा तू कहाँ।
इतना ही विचार लो-
बस हो गया भजन……

दृष्टि में तेरी खोट है
दुनिया निहार में।
गुरु ज्ञान अंजन सार लो-
बस हो गया भजन……

दुनियाँ तुम्हें बुरा कहे
पर तुम करो क्षमा।
वाणी को भी संवार लो-
बस हो गया भजन……

विषयों की तीव्र आग में
जलता ही जा रहा।
मन की तरंगें मार लो-
बस हो गया भजन……

रिश्तों से मोह त्याग कर
प्रभु से प्रेम कर।
इतना ही मन विचार लो-
बस हो गया भजन……

जाना है सबको एक
दिन दुनियाँ को त्याग कर।
जीवन को तुम संवार लो-
बस हो गया भजन……