ध्वजगान
यह ओ३म् का झण्डा आता है,
ऐ सोने वालो! जाग चलो ॥
लेकर उगते रवि की लाली,
ले नित बसन्ती हरियाली ॥
यह ले ले लहरें आता है,
धरती के जागे भाग चलो ॥
जब गोली गोले बरसेंगे,
यह सिर कट कट कर सरकेंगे ॥
हम मौत के भीषण आंगन में,
हंस-हंस खेलेंगे फाग चलो ॥
पर्वत से कह दो नम जाए,
सागर से कह दो थम जाये ॥
यह एक बनाने दुनिया को,
उमड़ा है अनुराग चलो ॥
अब प्रेम सच्चाई विद्या का,
यह झण्डा लहराया बांका ॥
हिंसा पाखंड अविद्या से,
कह दो अब तुम भाग चलो ॥










