जिसने भगवान के दर पे फरियाद की।
जिसने भगवान के
दर पे फरियाद की।
उसकी पल पल में
ईश्वर ने ईमदाद की।।
बाप ओ३म् का
झण्डा गिराता रहा।
बेटा उसको उठाकर
लहराता रहा।
जीत आखिर हुई
भक्त प्रहलाद की।।
रोज सीता को दासी
सताती रही।
गीत परमात्मा के
वह गाती रही।
लंका बरबाद की
सीता आजाद की।।
याद रखना वचन
कृष्ण भगवान का।
कर्म करना ही है
फर्ज इन्सान का।
कर्महीन की पदवी है वेदाद की।।
कर्म करते कदम को बढ़ाते चलो।
तेग बरछी ते सीना अड़ाते चलो।
टूट जायेगी खंजर यह जल्लाद की।।
धन संपदा को पायकर,
करें नहीं अभिमान ।
एक क्षण में रह जायेगा,
रखा सभी सामान ।।










