यज्ञ जीवन का हमारे श्रेष्ठ सुन्दर कर्म है।

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यज्ञ जीवन का हमारे श्रेष्ठ सुन्दर कर्म है।

यज्ञ जीवन का हमारे
श्रेष्ठ सुन्दर कर्म है।
यज्ञ का करना कराना
आर्यों का धर्म है।।

यज्ञ से दिशि हों
सुगन्धित शान्त हो वातावरण।
यज्ञ से सदा ज्ञान हो
और यज्ञ से शुद्ध आचरण ।।

यज्ञ से हो स्वस्थ काया
व्याधियां सब नष्ट हों।
यज्ञ से सुख सम्पदा हो
दूर सारे कष्ट हों।।

यज्ञ से दुष्काल मिटते
यज्ञ से जलवृष्टि हो।
यज्ञ से धन्य धान्य हो
बहुभांति सुखमय सृष्टि हो ।।

यज्ञ है प्रिय मोक्षदाता
यज्ञ शक्ति अनूप है।
यज्ञमय यह विश्व है यह
विश्वयज्ञ स्वरूप है।।

यज्ञ पुष्य प्रकाश से
सब ताप ताप तिमिर हरें।
यज्ञ नौका से अगम
संसार सागर से तरें।

लोग दिन में 21600 बार सांस लेते हैं। इसलिये चिदम्बरम के मंदिर की छत पर 21600 खपरैलें लगायी गयी हैं। हमारे शरीर में 72000 नसें हैं। वहाँ छत लगाते समय 72000 कीलें लगी हैं।