अब दहेज की चली बीमारी और कोई न करे इलाज।
अब दहेज की चली बीमारी
और कोई न करे इलाज।
बहुत बड़ी है जिम्मेदारी
तुम पर महिला आर्य समाज ।।
१. कितनी रोज दहेज के कारण
जलती है कन्याएं,
सिमट सिमट कर जाती है
जीवन की आशाएं।
हाथ पसारे भरें सिसकियां
किसी मदद की है मुहताज ।।
बहुत बड़ी है जिम्मेदारी …….
२. पहले बिकती रहीं लड़कियां
अब बिकते हैं लड़के,
ज्यों ज्यों धन की हवा लगे
यह त्यों-त्यों अग्नि भड़के।
तुम्हें बगावत करनी होगी
अपने हाथ उठाकर आज ।।
बहुत बड़ी है जिम्मेदारी…….
३. घर-घर बैठी युवा बेटियां
हसरत भरी निगाहें,
निर्धन माता-पिता निहारे
सूनी-सूनी राहें।
कब तक आंसू बरसाएगी
बेटी और पिता की लाज।।
बहुत बड़ी है जिम्मेदारी
४. तुम चाहो तो रुक सकती है
पाप जुलम की आंधी,
फिर यह गठड़ी नहीं खुलेगी
अब तुमने गर बांधी।
मिलकर उठो बदल के रख दो
‘पथिक’ ये उल्टे रस्मो रिवाज
बहुत बड़ी है जिम्मेदारी…….
पहले लोगों के मकान कच्चे थे
परन्तु रहने वाले पक्के थे,
आज लोगों के मकान
तो पक्के हैं परन्तु रहने वाले कच्चे हैं।।










