बस इक प्रभु जी मेरी कामना

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बस इक प्रभु जी मेरी कामना

बस इक प्रभु जी मेरी कामना,
तेरे चरणों में, मैं झुकी रहूँ।
जो भला किसी का ना कर सकूँ
तो बुरा किसी का मैं ना करूँ।।

मेरा अंग-अंग ऐसा रंग दे,
भक्ति का उसमें रंग दे।
तेरी भक्ति हो मेरी जिन्दगी,
जिसे दिल से मैं न जुदा करूँ।।
बस…….

तेरे संतो का मेरा साथ हो,
उनका ही सर पर हाथ हो।
तेरा नाम अमृत से भरा,
उन्हीं संतो से मैं सुना करूँ।।

पर दुःख मुझे पर्वत लगे,
अपना दुःख मुझे तिल भर लगे।
मेरा दाता मुझको शक्ति दो
कि मैं हर किसी की दुआ करूँ।।

घिरा चारों ओर अंधेरा है,
तुझ बिन नहीं कोई मेरा है।
अपनी शम्मा से रोशन करदो मुझे,
मुझे आसरा प्रभु तेरा है।।

तेरे चरणों में जो आया है,
तूने उसको अपना बनाया है।
मैं भी चरणों में तेरे आ गई,
मुझे पार तूने लगाना है।।

मन की मैल मिटी नहीं,
सुधरा नहीं आचार।
लाख करो संध्या हवन,
मिले न वह करतार।।