दिवस यह हर्ष का आया
दिवस यह हर्ष का आया,
शुभं भवतु शुभं भवतु ।
मगन मन झूम यह गाए,
शुभं भवतु शुभं भवतु ॥
प्रभु हरदम सहाई हों,
हितैषी हों सभी जग के।
पड़े न दुःख की छाया,
शुभं भवतु शुभं भवतु ॥
अधिकार को भूलें,
कर्तव्य याद रखें।
भाग्यवादी नहीं कर्मवादी बनें।










