चित्त की अशुद्धि के कारण

0
7

🌷चित्त की अशुद्धि के कारण🌷

(1) भूतकाल का स्मरण, व्यर्थ की भविष्य चिन्ता और वर्तमान में न जीना।

(2) अहंकार, कपट और आडम्बर का होना।

(3) दूसरों की निन्दा और अपनी प्रशंसा करना।

(4) संकीर्णवृत्ति, संग्रह वृत्ति और हर कार्य में निज स्वार्थ की भावना रखना।

(5) भेद-भाव की भावना रखना।

(6) मन, वचन, कर्म से एक न होना अर्थात् अन्दर से कुछ और बाहर से कुछ होना।

(7) कथनी-करनी में सदैव अन्तर रखना।

(8) दूसरों का अधिकार छीनना और अपना अधिकार दूसरों पर लादना।

(9) अति कामुक, अति भोजी, एवं अधिक बोलना।

(10) लक्ष्यहीन होना और सदैव क्रोध करना।

(11) असत्यवादी होना।

(12) आत्मविश्लेषण में रुचि न होना।

(13) सदैव गप्पे हाँकना।

चित्त शुद्धि के बिना ध्यान लगना संभव नहीं है। चित्त की अशुद्धि के जो कारण हैं, उन्हें दूर करके ध्यान के लिए प्रयास कीजिए आपको सरलता से ध्यान-साधना का लक्ष्य प्राप्त होगा।

भोग से योग की ओर जाने के लिए शारीरिक और मानसिक शक्ति का विकास आवश्यक है, इसके लिए योग के आठों अङ्गों का पालन करें।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here