अन्तर्यामी स्वामी तुमको
अन्तर्यामी स्वामी तुमको
बारम्बार प्रणाम है।
तुमने लोक रचाए हैं,
सूर्य चन्द्र चमकाए हैं,
सन्ध्या की ऊषा में तेरी
लीला ललित ललाम है ।।
अन्तर्यामी…..
विद्युत् की गति चंचल में,
वन पर्वत जल में थल में,
अली अवली फूलों फल में,
सघन लताओं में पक्षी गण
गाय रहे गुणगान हैं।
अन्तर्यामी……….
तू महान् से महान् है,
न कोई तेरे समान है,
वेदों का यह प्रमाण है,
दिया ऋषि ने यह ज्ञान है,
शीतल जगती-तल पर तुमको
सुमरे मिले विश्राम है।।
अन्तर्यामी……….
























