वेदवाणी में मानव को प्रभु ने कहा

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वेदवाणी में मानव को प्रभु ने कहा

वेदवाणी में मानव को प्रभु ने कहा
तू किसी जीव को मार, खाया न कर
दयावान प्रभु ने दया तुझको दी
ताकि जुल्म किसी पे तू ढाया न कर।।
वेदवाणी में मानव को प्रभु ने कहा…..

पशुपक्षियों का है सहारा प्रभु
फिर भी इन बेजुबानों को मारेगा तू
पेट में ना तू जीवों की कन्न बना
मौत के घाट इनको उतारा न कर ।।
वेदवाणी में मानव को प्रभु ने कहा…..

तेरी नजरों में मानव बड़ी खोट है
मौत से पहले दे दी इन्हें मौत है
इन बेचारों ने तेरा बिगाड़ा है
क्या बेरहम इनका जीवन मिटाया न कर।।
वेदवाणी में मानव को प्रभु ने कहा…..

जैसे अपनी ही जान है तुझको भली
वैसे उनको भी जीने की आशा बढ़ी
तुझको अगले जन्म में ना मारे कोई
तू पशु-पक्षियों को मारा न कर।।
वेदवाणी में मानव को प्रभु ने कहा……..

कितने आशियाँ उनके उजाड़े बता
कितने पाले हैं और कितने मारे बता
इतने पापों का कैसे तू देगा हिसाब
काँप जायेगा दिल लोग जब वो खबर।।
वेदवाणी में मानव को प्रभु ने कहा……

तेरे बच्चों को मारेगा कोई अगर
तेरे दिल पर बता कैसा होगा असर
छीन के तू पशु पक्षियों के बच्चे
कभी बच्चों को अपने खिलाया न कर।
वेदवाणी में मानव को प्रभु ने कहा……

कितना समझाये तो तू क्या समझे
भला फिर भी काटेगा मासूमों का तू गला
तेरी रग-रग में जब ये हिंसा भरी
फिर अहिंसा का पाठ पढ़ाया न कर।।
वेदवाणी में मानव को प्रभु ने कहा…….

भीगी आँखों से कहते ये संसार को
बन्द कर दो तुम हिंसा के व्यापार को
सबको रहना है ईश्वर की छाया तले
दीप जलते प्रभु के बुझाया न कर।।
वेदवाणी में मानव को प्रभु ने कहा……

प्रभु चाहे न बिगड़े किसी का जीवन
इसलिए देता है वो दिलों में रहम
तेरा प्रेम बनेगा जीवों का मरहम
अपने दिल से रहम को भगाया न कर।
वेदवाणी में मानव को प्रभु ने कहा…..

याद रख जैसे जीवन में तेरे करम
वैसा फल पायेगा मन में ना रख भरम
जिसने प्राण दिये वो निष्प्राण करे
तू प्रभु के कभी आड़े आया न कर।।
वेदवाणी में मानव को प्रभु ने कहा……..

एक दिन लोग जानेंगे दया धरम
कोई किसपे करेगा ना जुल्मो सितम
तू ‘ललित’ प्रेम लाने का करना जतन
इतनी जल्दी यूँ हिम्मत तू हारा न कर।।
वेदवाणी में मानव को प्रभु ने कहा……..