जब तक स्त्री जाति का, सत्कार न होगा।
जब तक स्त्री जाति का,
सत्कार न होगा।
निश्चय जानो देश का,
सुधार न होगा।। टेक।।
वेदवेत्ता कर गये,
ऋषि बयान, देख लो।
मिलें अनेकों ऐतिहासिक,
प्रमाण देख लो।
स्त्रियों का मान वहाँ
उत्थान देख लो।
जहाँ इनका अपमान
देश की हान देख लो।
पढ़ देखो लेख मनु का,
तनिक विचारना होगा।।1।।
जब स्त्री तक जाति का, सत्कार…….
पति पत्नी में जहाँ परस्पर प्यार रहता है।
एक दूसरे की इच्छानुसार रहता है।
ऐसे कुल में कुशल,
सभी प्रकार रहता है।
आठों याम नित सुख का ही,
संचार रहता है।
यदि चर्ले विपरीत तो,
बेड़ा पार न होगा।।2।।
जब स्त्री तक जाति का, सत्कार……….
भ्राता पति पति देवर,
गर चाहते हो कल्याण।
बहन, सुता, पत्नी,
भौजाई, का रखें नित ध्यान।
मधुर भाषण, भोजन
वस्त्र से करते रहें सम्मान।
किसी तरह से कभी इन्हें,
करें नहीं परेशान इनके
लिए तन-मन-धन,
सब कुछ वारना होगा।।3।।
जब तक स्त्री जाति का सत्कार……
यत्रनार्यस्तु पूज्यन्ते पढो
लिखा है खास
जहाँ स्त्रियों की पूजा,
वहाँ करें देवता वास।
वरना सब क्रिया निष्फल हो जाता है,
कुल नाश।
‘ताराचन्द’ दुःख द्वन्द्व बढ़े,
बन्द हो आनन्द प्रकाश।
बुद्धिधर यह स्वरभर,
छन्द उच्चारना होगा।।4।।
जब तक स्त्री जाति का सत्कार…….
संसार में उस मनुष्य का सत्कार होता है जो विद्वानों के उत्तम वचनों को सुनकर, सत्य और असत्य का ठीक-ठीक निर्णय कर, असत्य को छोड़कर, सत्य को ग्रहण करके यशस्वी होकर, पुण्य को प्राप्त होता है।










