श्रद्धानन्द के गीत गाता जा।
श्रद्धानन्द के गीत गाता जा।
तू दुनियाँ को आर्य बनाता चला जा।।
नहीं होने पावे कोई आर्य अधर्मी।
तू वेदों की शिक्षा दिलाता चला जा।।
श्रद्धानन्द के गीत ………….
अगर श्रद्धानन्द की है तेरे मन में श्रद्धा।
तू पतितों को छाती लगाता चला जा।।
न नहीं रहने पावे दलित भाई कोई।
छुआछूत को तू मिटाता चला जा।।
श्रद्धानन्द के गीत……..
अपने घरों की कुरीति मिटाकर।
तू जाति को ऊँचा उठाता चला जा।।
श्रद्धानन्द के गीत………….
कड़ी मेहनत करें और सब्र करें,
आपको आपकी मेहनत का फल जरूर मिलेगा।










