सत्संग में दयानन्द के मुंशीराम जा पहुँचा।

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सत्संग में दयानन्द के मुंशीराम जा पहुँचा।

सत्संग में दयानन्द के
मुंशीराम जा पहुँचा।
स्वामी के प्रवचनों ने
रच दी नई कहानी।।

मुंशीराम तो राम भए
बन गए ज्ञानी-ध्यानी।
सब त्याग दिया मुंशी ने
पकड़ी वेद की वाणी।।

देख दशा इस देश की,
शुद्धि का बाना पहन लिया।
बात बनेगी शिक्षा से,
यह मसला भी गहन लिया।।

भारत के बच्चे क्यों कर,
ईसा के गीत गाते हैं।
पूर्व की यह सन्तानें,
पश्चिम को क्यों जाते हैं।।

खोल गुरुकुल श्रद्धानन्द ने,
यह मसला भी हल किया।
दो-दो पत्र निकाल दिए,
फिरंगी का दिल दहल गया।।

जामा मस्जिद पहुँच गया
वेदों की बोली वाणी।
दो-दो पत्र निकाल दिए,
शांतिमय क्रान्ति कर डाली ।।

संगीनों पे छाती तानी,
अंग्रेजों को ललकारा।
ओ३म् का झण्डा फहराया,
बोला वेद का जयकारा।।

शहीद हुए खा के गोली,
यूँ चला गया देश का प्यारा।
बोला वेद का जयकारा,
बोला वेद का जयकारा ।।