आओ युवकों तुम्हें सुनायें, गाथा ऋषि महान की।

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आओ युवकों तुम्हें सुनायें, गाथा ऋषि महान की।

आओ युवकों तुम्हें सुनायें,
गाथा ऋषि महान की।
जिसकी कृपा से फैली है,
ज्योति यहाँ पर ज्ञान की।

भारत में अज्ञान अन्धेरा,
चारों ओर ही छाया था,
आजादी का मार्ग,
स्वामी ने हमें दिखलाया था,
जाति में भी जान आ गई,
जो जाति बेजान थी।
आओ युवकों तुम्हें सुनायें गाथा ऋषि……

छूत-छात और जात-पांत के,
झगड़ों ने बरबाद किया,
फूट की डायन ने था,
अंग्रेजों को यहाँ आबाद किया,
वेद को भूले, चर्चा थी अंजील,
कुरान, पुराण की।।
आओ युवकों तुम्हें सुनायें गाथा ऋषि……

जहर के प्याले पीकर उसने,
अमृत हमें पिलाया था,
‘नन्दलाल’ दुनिया को,
मार्ग वेदों का दिखलाया था,
देकर अपनी जान,
बचाई जान ऋषि-सन्तान की।
आओ युवकों तुम्हें सुनायें गाथा ऋषि……

“लोगों को कभी भी चित्रों की पूजा नहीं करनी चाहिए। मानसिक अहंकार का फैलाव मूर्तिपूजा के प्रचलन की वजह से है-ऋषि दयानन्द