भारत के एक संन्यासी की, हम कथा सुनाते हैं।

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भारत के एक संन्यासी की, हम कथा सुनाते हैं।

भारत के एक संन्यासी की,
हम कथा सुनाते हैं।
सच्चे ईश्वर विश्वासी की,
हम व्यथा सुनाते हैं।।
शिवरात्रि का व्रत छोड़ा,
पाखण्ड से नाता तोड़ा।
झूठे शिव से तोड़ा नाता,
सच्चे शिव से जोड़ा।।

वन-वन में फिरे भूख भी,
रहे महादु: ख पाया-
सुनकर के जिनकी व्यथा,
नैन आँसू भर आते हैं।।
भारत के एक सफल
संन्यासी की हम कथा …….

जब गुरु मिला नहीं ज्ञानी,
काशी जाने की ठानी।
काशी में गुरु विरजानन्द की
, किसी से सुनी कहानी ।।
तब मथुरा को चले,
गुरुवर से मिले बहुत हर्षाये।
कर प्रणाम गुरु चरणों में,
फूले नहीं समाते है।।
भारत के एक सफल
संन्यासी की हम कथा …….

ऋषि हरिद्वार में आये,
वैदिक सन्देश सुनाये।
सुनकर प्रबल गर्जना,
ऋषि की पाखंडी घबड़ाये।
यह देख धीरता स्वामी की,
मस्तक झुक जाते हैं।।
भारत के एक सफल
संन्यासी की हम कथा …….

सत्यार्थ प्रकाश बनाया,
मिथ्या विश्वास हटाया।
इतने पर भी जगन्नाथ ने,
ऋषि को जहर पिलाया।।
दिये दिवाली जले ऋषि तब,
चले मन्द मुस्काये।
यह देख दृश्य गुरुदत्त नास्तिक,
आस्तिक बन जाते हैं।।
भारत के एक सफल
संन्यासी की हम कथा……