सुनो सुनो ऐ दुनियाँ वालों, दयानन्द की अमर कहानी।
सुनो सुनो ऐ दुनियाँ वालों,
दयानन्द की अमर कहानी।
ऋषिवर इतने पूज्य हैं जग में,
जितना गंगा माँ का पानी।।
गुजरात प्रान्त टंकारा ग्राम में,
महर्षि ने जन्म लिया
शंकर के सच्चे खोजी को,
मूल शंकर नाम दिया
जगे भाग्य भारत के जब,
शिवरात्री का व्रत तोड़ा था
सच्चे शिव की चले खोज में,
निज गृह से बन्धन तोड़ा था
अपने प्रण पर अटल रहे,
और मात-पिता की एक न मानी । ।।1।।
सुनो सुनो ऐ दुनियाँ वालों, दयानन्द की……
भारत भर में भ्रमण किया,
पर मिला न कोई सच्चा ज्ञानी
काशी में गुरु विरजानन्द की,
सुनी किसी से कहानी
वन-वन भटके, संकट सहके,
जब मथुरा में आए
कर प्रणाम वह गुरु चरणों में,
फूले नहीं समाए
अन्धकार में भटक रहे थे,
भारत भर के प्राणी।।2।।
सुनो सुनो ऐ दुनियाँ वालों, दयानन्द की…..
हरिद्वार से चलकर ऋषिवर,
कर्णवास में आये
कर्णवास में आकर के जब,
सत्य सन्देश सुनाये
कर्णवास वासी सुन-सुनकर,
फूले नहीं समाये
इस पर क्रोधित राव कर्णसिंह,
ले तलवार को धाये
देख के मुस्कराये जब ऋषिवर,
नयनों में थी कुछ लाली
छीन कर के तलवार,
उन्होंने टूक-टूककर डाली
देख के घबड़ाये तब राव,
शर्म से हो गये पानी-पानी।।3।।
सुनो सुनो ऐ दुनियाँ वालों, दयानन्द को…..
भारत भर में घूम-घूमकर,
वेदों का प्रचार किया
जोधपुर में जगन्नाथ ने,
महर्षि को जहर दिया
मना रहा था सारा भारत,
जगमग जगमग दीवाली
उसी समय भारत माता की,
गोदी हो रही खाली
ऐसे महर्षि इस जग में,
बार-बार नहीं आते हैं
जो निज जीवन की भेंट चढ़ा,
जग को जीवन दे जाते हैं
उस ऋषिवर की सच्ची कीमत,
‘गुरुदत्त’ ने पहिचानी।।4।।
सुनो सुनो ऐ दुनियाँ वालों, दयानन्द की……
‘स्वर्ग कामो यजेत’
स्वर्ग की कामना के लिए यज्ञ करें।










