आओ सुनें क्या कहा है ऋषि ने।
आओ सुनें क्या कहा है ऋषि ने।
उपकार कितना किया है ऋषि ने।।
ऋषि ने कहा सत्य क्या है यह जानो,
सुनो सब किसी की, मगर वह ही मानो
जिसे तर्क से, ज्ञान से, सिद्ध पाओ,
उसे शीघ्र निज आत्मा में, बसाओ।
ये सज्ञान हमको दिया है ऋषि ने।।
आओ सुनें क्या कहा है…….
सभी का भला हो, जो यह चाहता है,
वही सच्चे ईश्वर को पहचानता है,
जो सबको ही भाई के सम देखता है,
वही सच्चा मानव, वही देवता है।
यही पुस्तकों में, लिखा है ऋषि ने।।
आओ सुनें क्या कहा है……
रहे न अशिक्षित धरा पर कोई अब,
बने वेद के ज्ञान से युक्त मानव,
न हो रोग और शोक, घर में किसी के,
हो सन्ध्या-हवन-यज्ञ घर में सभी के।
यही भाव मन में, भरा है ऋषि ने।।
आओ सुनें क्या कहा है…….
किया राष्ट्र-रक्षा में बलिदान तन को,
रखा धैर्य उर में रखा स्वच्छ-मन को।
विष का भी प्याला पिया है ऋषि ने।।
आओ सुनें क्या कहा है……
हो नारी का सम्मान, घर-घर में सबके,
हो अतिथि का भी मान, घर-घर में सबके,
हो माँ-बाप से प्यार, घर-घर में सबके,
परस्पर हो सत्कार, घर-घर में सबके।
वही घर स्वर्ग सा कहा है ऋषि ने।।
हम सेठ का काम किये बिना उससे वेतन नहीं चाहते तो ईश्वर का काम किये बिना ईश्वर से फल क्यों चाहते हैं? यह तो न्याय नहीं है।










