सुख में आनन्द है, दुःख में आनन्द है।
सुख में आनन्द है, दुःख में आनन्द है।
जैसे राखोगे भगवन, दिल रजामन्द है।।
जीवन का गीत है, सुर में ना ताल में।
उलझा क्यूं मानव माया के जाल में।
मुझे तेरा रूखा सूखा दिया ही पसन्द है।।
सुख में आनन्द है, दुःख में…….
विषयों का तेरे मन पर, मैल चढ़ा है।
झांक ले भीतर सांई, सम्मुख खड़ा है।
पर कैसे दर्शन होगा, खिड़की जो बन्द है।।
सुख में आनन्द है, दुःख में…….
जीवन मरण का खेला, चलता रहेगा।
पावन ये चोला शायद, फिर ना मिलेगा।
ओ३म् के रंग में रंग दे, साँसे जो चन्द हैं।।
सुख में आनन्द है, दुःख में ……..
फूलों की सेज हो या कांटों का ताज हो।
तेरी भक्ति में मालिक, मेरा संसार हो।
तेरे ही हाथों मेरी डोर पतंग है।।
सुख में आनन्द है, दुःख में……
विनती ‘जवाहर’ की कुछ, ऐसा कर पाऊँ।
वैदिक गीतों को जाकर, घर घर सुनाऊँ।।
मेरी तो प्रेरणा, ऋषि दयानन्द है।।
सुख में आनन्द है, दुःख में…….










