पढ़ो सत्यार्थ प्रकाश, जब भी मिले तुम्हें अवकाश

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पढ़ो सत्यार्थ प्रकाश, जब भी मिले तुम्हें अवकाश

पढ़ो सत्यार्थ प्रकाश,
जब भी मिले तुम्हें अवकाश,
यह मन के मैलों को
साफ करने की है उत्तम साबुन,
रखो इसके ऊपर निष्भ्रम पूर्ण विश्वास
पढ़ो सत्यार्थ प्रकाश, जब भी मिले तुम्हें….।1।

अज्ञान, अंधविश्वास,
पाखण्ड, दुर्गुण और भ्रम
सभी नष्ट हो जाते,
जब करोगे इसे पढ़ने का श्रम
है यह संजीवनी बूटी, रखो अपने पास………
पढ़ो सत्यार्थ प्रकाश, जब भी मिले तुम्हें…..

यह महर्षि दयानन्द कृत है,
हैं चारों वेदों का सार,
लिखे इसमें जीवन उन्नत करने के,
सभी कारण व प्रकार,
और सभी महत्वपूर्ण बातें, जो है खास खास…………….।2।
पढ़ो सत्यार्थ प्रकाश, जब भी मिले तुम्हें….

महर्षि ने लिखा इसे,
मानव मात्र का करने कल्याण
पढ़ो और इसके अनुसार आचरण करके,
बनाओ अपने को बलवान
बन जाओगे महान,
जितना महान आकाश…..
पढ़ो सत्यार्थ प्रकाश, जब भी मिले तुम्हें….

महर्षि का जीवन था,
सुधार और परोपकार के लिए
इसी उद्देश्य के लिए लिखा,
उन्होंने यह’ सत्यार्थ प्रकाश’
इसमें भरा वह ज्ञान,
जो नहीं होने देता कभी हताश…..
पढ़ो सत्यार्थ प्रकाश, जब भी मिले तुम्हें….

जीवन की परीक्षा में,
यदि होना है तुम्हें पास
परिवार तुम्हारा सुखी बने,
न आवे कभी खट्टास
तो इसको पढ़ने का, कभी न छोड़ो अभ्यास…..
पढ़ो सत्यार्थ प्रकाश, जब भी मिले तुम्हें….

इसको पढ़ने से बनेगा,
तुम्हारा जीवन अति पवित्र
स्वास्थ्य, बुद्धि, यश, सफलता,
बनेंगे तुम्हारे मित्र
कभी न पढ़ने पर,
कोई क्रिया छूट गई, ऐसा हो आभास………7
पढ़ो सत्यार्थ प्रकाश, जब भी मिले तुम्हें….

ग्रन्थ यह अमूल्य है,
लिखे इसमें बुद्धि पाने के सब काम
यदि धर्म से अर्थ व काम लिया तो,
मिलेगा तुम्हें मोक्षधाम
इसकी शिक्षाओं से बढ़ते ही,
न होगा कभी हास्य…….8
पढ़ो सत्यार्थ प्रकाश, जब भी मिले तुम्हें…..

गुरुदत्त, श्रद्धानन्द,
बिस्मिल ने पढ़ा था सत्यार्थ प्रकाश
महात्मा नारायण स्वामी ने हटवाया
प्रतिबन्ध करके सप्रयास
जीवन उनका बदल गया,
बन गये इसी के दास….
पढ़ो सत्यार्थ प्रकाश, जब भी मिले तुम्हें….

यह सज्ञान का पूँज है,
करता सत्य का ही प्रकाश
इस अलौकिक ग्रन्थ को पढ़ने की,
लगी रहे तुम्हें प्यास सभी
इसे पढ़ते रहें’ खुशहाल’
रखता तुमसे यही आश……..10
पढ़ो सत्यार्थ प्रकाश, जब भी मिले तुम्हें…….