यज्ञोपवीत लेकर खुद को निहारना है।

0
85

यज्ञोपवीत लेकर खुद को निहारना है।

यज्ञोपवीत लेकर खुद को निहारना है।
जीवन सुधारने का संकल्प धारना है।
हर झूठ की तरफ से मुँह अपना फेरना है।
सच्चे व्रों का पालन करने की प्रेरणा है।
तप त्याग साधना को हरदम उभारना है।
जीवन सुधारने का संकल्प…..

गायत्री, सन्ध्या, स्वाध्याय, यज्ञ करना।
दुष्टों की संगति में हरगिज न पांव धरना।
भगवान् को कभी न दिल से विसारना है।
जीवन सुधारने का संकल्प…….

समझो ये तीन ऋण है,
कन्धे पे तीन धागे।
जब तक है प्राण इन से,
व्यक्ति कभी न भागे।
माता-पिता गुरु के,
ऋण को उत्तारना है।
जीवन सुधारने का संकल्प………….

पितरों की टहल सेवा,
देवों की उचित पूजा।
ऋषियों के संग जैसा,
कत्र्त्तव्य है न दूजा।
निष्कपट स्वच्छ सुन्दर,
जीवन गुजारना है।
जीवन सुधारने का संकल्प …..

नेकी के काम करके,
फल की चाह न लाना।
निष्काम भाव होकर
औरों के काम आना।
शिक्षा का सूत्र है यह,
मन में विचारना है।
जीवन सुधारने का संकल्प ……

शुभ चिन्ह आर्यों का,
यज्ञोपवीत है यह।
सब श्रेष्ठ लोग पहनें,
ऋषियों की रोत है यह।
दुनियां में ‘पथिक’ इसके,
यश को निखारना है।
जीवन सुधारने का संकल्प…….