कहीं पर जीत होती है, कहीं पर हार होती है।

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कहीं पर जीत होती है, कहीं पर हार होती है।

कहीं पर जीत होती है,
कहीं पर हार होती है।
यही है जिन्दगी प्यारे,
जो दिन दो-चार होती है।
जो पेड़ों को लगाते हैं,
सभी तो फल नहीं खाते,
यहाँ प्रारब्ध भी कोई चीज,
आखिरकार होती है।
कहीं पर जीत होती है, कहीं पर…….

किसी भी काम में जब तक,
न हो मरजी विधाता की,
बड़ी कोशिश करे कोई,
मगर बेकार होती है।
कभी खिलवाड़ फूलों से,
कभी आकाश से बातें,
कभी तूफान में नैया,
पड़ी मंझधार होती है।
कहीं पर जीत होती है, कहीं पर…….

यह बचपन ही सहारा है,
जवानी और बुढ़ापे का,
अजीब यह नींव है,
जिस पर खड़ी दीवार होती है।

यह जीवन एक नदिया है,
तो सुख-दुःख दो किनारे हैं,
ये दोनों साथ रहते हैं,
जहाँ जलधार होती है।
कहीं पर जीत होती है, कहीं पर……

यह दौलत नाव ही समझी,
जो आती और जाती है,
कभी इस पार होती है,
कभी उस पार होती है।

‘पथिक’ मंजिल पे सब पहुँचे,
कोई आगे कोई पीछे,
कि हर इंसान की जग में,
अलग रफ्तार होती है।
कहीं पर जीत होती है, कहीं पर…..