कर दी जगत की रचना, बिना हस्त बिना भाल

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कर दी जगत की रचना, बिना हस्त बिना भाल

कर दी जगत की रचना,
बिना हस्त बिना भाल,
हे सृष्टि के रचयिता,
तूने कर दिया कमाल

इक क्षण को भी न रुकते,
तेरे सूर्य चन्द्र लाल
समय पर सदा चलते हैं,
ये बड़े ही बेमिसाल
हे सृष्टि के रचयिता, तूने…….

मानव अजब बनायी,
तूने करके भलाई
आकृति सबकी अलग है,
कितनी चतुराई
आकृति अलग बनाकर,
तूने कर दिया निहाल ।
हे सृष्टि के रचयिता, तूने…..

सब पर तू दया करता,
किसी की न बुराई वाह रे प्रभु,
क्या तूने करामात दिखाई
हे सृष्टि के रचयिता, तूने…….

पल भर में ही तू करता,
अपने भक्तों को निहाल,
हे सृष्टि के रचयिता,
तूने कर दिया कमाल
हे सृष्टि के रचयिता, तूने……