सुबह-शाम भजन कर ले

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सुबह-शाम भजन कर ले

सुबह-शाम भजन कर ले,
मुक्ति का यतन कर ले।
छूट जायेगा जन्म-मरण,
प्रभु का सुमिरन कर ले।।

यह मानव का चोला,
हर बार नहीं मिलता,
जो गिर गया डाली से,
वह फूल नहीं खिलता।
मौका है यह जीवन का,
गुलजार चमन कर ले।।1।।
सुबह-शाम भजन कर ले, मुक्ति……

नर इन कामों से सुन,
तू संतों की वाणी।
मन को ठहरा करके,
बन जा आत्म ज्ञानी।
जिह्वा तो चले मुख में,
अब ओ३म् जपन कर ले। ।2।।
सुबह-शाम भजन कर ले, मुक्ति…….

इस मैली चादर में,
हैं दाग लगे कितने।
पर ज्ञान के साबुन में,
हैं झाग भरे इतने।
धुल जायेगी सब स्याही,
उजला तन मन कर ले। ।3।।
सुबह-शाम भजन कर ले, मुक्ति……

सुन वेदों में गूँज रही,
मंत्रों की मधुर ध्वनियाँ।
बलिदान की कड़ियों में,
तू गूँथ नयी कड़ियाँ।
प्रभु के आगे अब तो,
नीची गर्दन कर ले।।4।।
सुबह-शाम भजन कर ले, मुक्ति…..