इस बार भजन कर ले, मुक्ति का यतन कर ले।
इस बार भजन कर ले,
मुक्ति का यतन कर ले।
छुट जाएँगे जन्म-मरण,
प्रभु का सिमरण कर ले।
यह मनुष्य का चोला,
हर बार नहीं मिलता,
जो गिर गया डाली से,
वह फूल नहीं खिलता।
मौका है यह जीवन का,
गुलजार चमन कर ले।।1।।
इस बार भजन कर ले, मुक्ति का…….
नर इन कानों से,
तू सुन सन्तों की वाणी,
मन को ठहरा करके,
बन जा आत्मज्ञानी।
जिह्वा न चले मुख में,
अब प्रभु नाम रटन रट ले। ।2।।
इस बार भजन कर ले, मुक्ति का…….
मस्तानों की टोली में,
ले नाम लिखा अपना,
तब आयेगी साफ नजर,
है दुनिया इक सपना।
धुल जायेगी सब स्याही,
उजला तन मन कर ले। ।3।।
इस बार भजन कर ले, मुक्ति का……
जो सन्तों ने गाया है,
मैं भी हूँ उस धुन में,
उस धुन को सुन-सुनकर,
जग रमा उसी धुन में।
प्रभु के आगे अब तो,
नीची गरदन कर ले।।4।।
इस बार भजन कर ले, मुक्ति का……..










