निर्धनता से बड़ा कोई, इस दुनिया में अभिशाप नहीं।
निर्धनता से बड़ा कोई
इस दुनिया में अभिशाप नहीं।
सत्य बराबर पुण्य नहीं
और झूठ बराबर पाप नहीं।।
निर्धनता से बड़ा कोई इस……
एक पेड़ पर दो पक्षी रहते हैं,
वेद यही बताता है।
दोनों नित्य अभिन्न सखा है,
ऐसा गहरा नाता है।
एक पेड़ के फल खाता है,
एक देखता जाता है।
पड़ा बीच अज्ञान का परदा,
होता मेल-मिलाप नहीं।
निर्धनता से बड़ा कोई इस …….
यों तो इस दुनिया के अन्दर,
कष्ट हजारों आते हैं।
जो हर वक्त रुलाते हैं
सुलगाते हैं तड़पाते हैं।
इस पर भी इक बात अनोखी
सज्जन लोग बताते हैं।
जीवन में चिन्ता से बढ़कर
और कोई सन्ताप नहीं।
निर्धनता से बड़ा कोई इस…….
दृढ़ता और लगन से मानव,
मंजिल हासिल करता है।
जहाँ कहीं आलस्य आ गया,
वहीं पे खेल बिखरता है।
ढीले काम अधूरे रहते,
कच्चा रंग उतरता है।
तब तक बात नहीं बनती है,
जब तक लगती छाप नहीं।
निर्धनता से बड़ा कोई इस…….
जिह्वा अमृत रस में भीगी
हरदम रहती गीली है।
न लकड़ी न लोहा इसमें
कोमल और लचीली है।
रैन दिवस हरकत में रहती
ऐसी यह फुर्तीली है।
‘पथिक’ यह कड़वे बोल बोलती,
करे मधुर आलाप नहीं।
निर्धनता से बड़ा कोई इस……










