चेतावनी
यदि नहीं जान पाए, अपने आप को।
फिर कैसे जानोगे, भैया पुण्य पाप को ।।
कौन हो कहाँ से आए, और कहाँ जाओगे।
यह भी ना जान पाए, फिर पछताओगे।
प्रायश्चित में-2, बदला नहीं पश्चाताप को।।
यदि नहीं जान पाए……..
वेद, स्मृति, सदाचार, के विचार को।
आचरण में ढाला नहीं, सद्विचार को।
धर्म समझा-2 कण्ठीमाला तिलक छाप को ।।
यदि नहीं जान पाए…..
चित्त वृत्तियों का यदि, विरोध न किया।
विषय वासनाओं का यदि, निरोध न किया।
भावना से 2, जपा नहीं, यदि ओ३म् नाम को।।
यदि नहीं जान पाए……..
सरगम सीखी नहीं, जीवन के संगीत की।
ले स्वर तान रागों के, रीत नीत की।
कहते हो वरदान-2, ‘प्रेमी’ कैसे अभिशाप को ।।
यदि नहीं जान पाए……..










