शिक्षा
रोते हुए आए थे, हँसते हुए जाना है।
रोतों को हंसाना है, गिरतों को उठाना है।।
तुम धर्म भी करते रहो, तुम कर्म भी करते रहो
असुरों से लड़ते रहो और ईश से डरते रहो,
न कुछ ले आए थे, न साथ ही जाना है
रोते हुए आए थे, हँसते हुए जाना है।।1।।
जीवन यह होम बने, हर मानव सौम्य बने
खुशियाँ जो बिखेरोगे, खुशियाँ ही बटोरोगे
फूलों पर काँटों पर, बढ़ते ही जाना है।
रोते हुए आए थे, हँसते हुए जाना है।।2।।
क्यों शंख बजाना है, क्यों भोग लगाना है,
दुःखियों की करो सेवा, जो ईश रिझाना है।
सन्देश यह वेदों का, घर-घर में सुनाना है। ।3।।
रोते हुए आए थे, हँसते हुए जाना है
रोतों को हंसाना है, गिरतों को उठाना है।।










