कृतज्ञता
हे नाथ तुम्हारी महती दया,
मानव-तन हमें प्रदान किया,
तुम धन्य अहो जग के स्वामी,
हम पर उपकार महान् किया।।1।।
हे नाथ तुम्हारी महती दया……..
जग के तुम कर्त्ता-धर्ता हो,
सुख के दाता दुःख हर्त्ता हो।
तेरा गुण कीर्तन करने को,
वेदों ने विधि विधान किया।।2।।
हे नाथ तुम्हारी महती दया…….
हे ईश तुम्हें हम ध्याते हैं,
तुमको ही शीश नवाते हैं।
ऋषि-मुनियों और योगियों ने,
सतत् तेरा ही गुणगान किया।।3।।
हे नाथ तुम्हारी महती दया……..
कर्त्तव्य के हम में भाव भरो,
हमको भव से शिव पार करो।
कृत-कृत हुआ वह जन जिसने,
तन प्रेम सुधा रस पान किया।।4।।
हे नाथ तुम्हारी महती दया
मानव-तन हमें प्रदान किया।।










