कृतज्ञता
सब जग के आधार, नमस्कार नमस्कार।
आये तेरे द्वार, नमस्कार नमस्कार।। टेक ।।
सुरज और चाँद में, तेरा ही उजाला,
तूने पहन रखी है सितारों की माला।
महिमा अपरम्पार, नमस्कार नमस्कार।।1।।
कोयल की कू-कू, सबको है भा रही,
पञ्चम के स्वर में, मधुर गीत गा रही।
यही रही पुकार, नमस्कार नमस्कार।।2।।
पर्वतों की चोटियों को, बादल हैं चूमते,
पृथ्वी, सूरज, चाँद सितारे, सारे ही हैं घूमते।
नियम अनुसार, नमस्कार नमस्कार।।3।।
फुलवाड़ी को देखो, कैसे फूल हैं निराले,
नीले पोले और गुलाबी, कोमल खुशबू वाले।
छाई है बहार, नमस्कार नमस्कार।।4।।
आत्मा का रथ कैसा, सुन्दर बनाया है,
मन, बुद्धि इन्द्रियों से, इसको सजाया है।
अष्ट चक्र नव छार, नमस्कार नमस्कार।।5।।
जगत् जननी माता हमको, तेरा ही सहारा है,
तेरे बिना और ना, कोई भी हमारा है।
भव से कर दो पार, नमस्कार नमस्कार।।6।।
प्रभु अपनी भक्ति का वरदान देना,
शिव संकल्प और सुविचार देना।
वेदों के अनुसार, नमस्कार नमस्कार ।।7।।
कहे ‘नन्द लाल’ सबकी आत्मा पवित्र हो,
देह हो नीरोग और ऊँचा चरित्र हो।
विनती बारम्बार, नमस्कार नमस्कार।।8।।










