भक्ति
अब सौंप दिया इस जीवन का,
सब भार तुम्हारे हाथों में।
है जीत तुम्हारे हाथों में,
है हार तुम्हारे हाथों में।।1।।
अब सौंप दिया इस जीवन का…..
मेरा निश्चय है एक यही,
इक बार तुम्हें पा जाऊँ मैं।
अर्पण कर दूँ जगती भर का,
सब प्यार तुम्हारे हाथों में।।2।।
अब सौंप दिया इस जीवन का…..
या तो मैं इस जग से दूर रहूँ,
और जग में रहूँ तो ऐसे रहूँ।
इस पार तुम्हारे हाथों में,
उस पार तुम्हारे हाथों में।।3।।
अब सौंप दिया इस जीवन का ….
यदि मानुष ही मुझे जन्म मिले,
तब तब चरणों का पुजारी बनूँ।
मुझ पूजक की इक-इक रग का,
हो तार तुम्हारे हाथों में।।4।।
अब सौंप दिया इस जीवन का……
जब-जब संसार का बन्दी बन,
दरबार तुम्हारे आऊँ मैं।
हो मेरे पापों का निर्णय,
सरकार तुम्हारे हाथों में।।5।।
अब सौंप दिया इस जीवन का
मुझमें तुझमें है भेद यही,
मैं नर हूँ तू नारायण है।
मैं हूँ संसार के हाथों में,
संसार तुम्हारे हाथों में।।6।।
अब सौंप दिया इस जीवन का…..










