भक्ति
है पत्थरों वाली नदी संसार साथियों,
मिलकर सभी कर जाओ इसे पार साथियों।
कर्मण्यता को छोड़, क्यों आलस्य में पड़े,
मन में नया उत्साह ले, हो जाओ अब खड़े।
दृढ़ निश्चय से निज को करो, तैयार साथियों।।1।
है पत्थरों वाली नदी…….
जो भी अभद्र हैं, उन्हें यहीं पे छोड़ दो,
कल्याणकारी कर्मों से, अपने को जोड़ दो।
हों एक तुम्हारे सदा, विचार साथियों। ।2।।
है पत्थरों वाली नदी……..
काँटे भी मिलेंगे कहीं, पै फूल खिलेंगे,
अनुकूल मिलेंगे कहीं, प्रतिकूल मिलेंगे।
साहस न किन्तु देना, तुम बिसार साथियों। 1311
है पत्थरों वाली नदी……
गर साधना में शक्ति है तो साध्य मिलेगा,
आराधना है सत्य तो, आराध्य मिलेगा।।
होंगे ‘मधुर’ सपने, सभी साकार साथियों। ।4।।
है पत्थरों वाली नदी………










