बैठ दो घड़ी कर प्रभु का भजन।

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भक्ति

बैठ दो घड़ी कर प्रभु का भजन।
बन्धनों से बच ले-2-करके भजन ।।

रचा जिसने सुन्दर ये संसार सारा,
जगत् में उसी का है सब बसारा।
गीत गाओ उसी के 2 तू होकर मगन। ।।1।।
बैठ दो घड़ी कर प्रभु …….

दया से है उसकी मनुज देह पाई
तेरे भोग की सारी चीजें बनाई।
किया कितना उपकार-2 जरा कर मनन ।।2।।
बैठ दो घड़ी कर प्रभु …….

तृष्णा न होगी कभी मन की पूरी,
करो लाख कोशिश रहती अधूरी।
संतोष सम ना-2 कोई और धन।।3।।
बैठ दो घड़ी कर प्रभु ……….

अगर चाहता है तू उद्धार अपना,
बना ले प्रभु को ही आधार अपना।
मधुर जिन्दगी में-2 खिलेंगे सुमन। ।।4।।
बैठ दो घड़ी कर प्रभु …….