भक्ति
मन में मिलन की चाह तो,
लाए कभी नहीं,
दर्शन तभी तो ईश के,
पाए कभी नहीं।।1।।
वह फूल क्या बता सके,
होती है क्या हँसी।
जिस पर पड़े बहार के,
साए कभी नहीं। ।2।।
मन में मिलन की चाह तो …….
हर वक्त बोलते रहे,
क्या क्या जबान से,
नगमे प्रभु के झूम के,
गाए कभी नहीं।।3।।
मन में मिलन की चाह तो ……..
बातें हजार शौक से,
सुनते हैं रात दिन,
ऋषियों के सदुपदेश ही,
भाए कभी नहीं।।4।।
मन में मिलन की चाह तो
दुःखियों को देख राह में,
बच कर निकल गए,
उनकी मदद में हाथ,
हिलाए कभी नहीं ।।5।।
मन में मिलन की चाह तो ……..
दिल की जमी पै चैन की,
बारिश कहाँ से हो,
बादल गगन में प्यार के,
छाए कभी नहीं। ।6।।
मन में मिलन की चाह तो ………
आखिर मिले तो क्यों मिले,
मंजिल ‘पथिक’ तुझे,
मंजिल की ठीक राह पै,
आए कभी नहीं। ।7।।
मन में मिलन की चाह तो ………










