ईश्वर यही विनय है, एक आसरा तेरा हो।

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भक्ति

ईश्वर यही विनय है, एक आसरा तेरा हो।
स्वामी पिता व माता, बस एक तू मेरा हो।
फूलों में गंध तेरी पत्तों में रंग तेरा
देखा न कोई जर्रा, जिस में न तू बसा हो।
।।1।।
ईश्वर यही विनय है……………..

उस घर में सुख की वर्षा, होवें भला न क्यों कर।
जिस घर का बच्चा बच्चा, प्रभु नाम में लगा हो।।2।।
ईश्वर यही विनय है……….

वर एक ही दयामय, मैं आप से ये पाऊँ।
बलिदान मेरा तन-मन, निज धर्म पे सदा हो।।3।।
ईश्वर यही विनय है। ……….

ममता के जाल में मैं, जकड़ा हुआ हूँ भगवन् ।
करना उद्धार जबकि, अज्ञान में फंसा हैं।।4।।
ईश्वर यही विनय है। ………..

सारा जगत् हो रोशन, वेदों की रोशनी से।
वैदिक धर्म का झंडा, हर देश में लगा हो। ।5।।
ईश्वर यही विनय है……….