काले कर्मचारियों के काल के कमान जैसी

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काले कर्मचारियों के काल के कमान जैसी

दयानन्द बावनी

कवि दुलेराय काराणी

बानी में भवानी है

काले कर्मचारियों के काल के कमान जैसी।
जुग की जबान रामबाण तेरी बानी है॥

केते-केते कोटि पाप पाखण्डों के काटिबे को।
तेरी बानी तेज ताको तेजदार पानी है॥

बानी महारानी हिंदी गंदी थी मनाती ताको।
तूने ही पिछानी तेरे स्नेह ते सोहानी है॥

अविद्या असत असुरन के बिदारिबे को।
तेरी वज्र गर्जना सी बानी में भवानी है॥२१॥