प्रभु जी मुझे वरदान दो
(तंर्ज – है इसी में प्यार की आबरू)
प्रभु जी मुझे वरदान दो मैं कभी न तुम से जुदा रहूँ।
जैसे घी व दूध मिले रहें वैसे मैं भी तुम से मिला रहूँ।
प्रभु जी मुझे वरदान दो…….
१. जो मिलन पतंग व डोर में।
जैसे प्यार चन्द्र चकोर में।
दिल में लगन ऐसी लगे तेरी धुन में मस्त बना रहूँ।
प्रभु जी मुझे वरदान दो……..
२. ज्यों सुमन सुगन्ध का मेल है।
जैसे तन व प्राण का खेल है।
हर हाल में हर काल में तेरे रंग में ही रंगा रहूँ।
प्रभु जी मुझे वरदान दो………
३. कोई कर सके मजबूर न।
पल भर कभी रहूँ दूर न।
न वियोग हो संयोग में मनोयोग से मैं जुड़ा रहूँ।
प्रभु जी मुझे वरदान दो…….
४. तेरी वन्दना मेरा कर्म हो।
तेरी साधना मेरा धर्म हो।
मेरा देवता मेरे पास हो मैं उपासना में जुटा रहूँ।
प्रभु जी मुझे वरदान दो…….
- बस एक है मेरी चाहना।
नहीं दूसरी कोई कामना।
यूँ ही उम्र भर तेरे द्वार पर कर जोड़ कर मैं खड़ा रहूँ।
प्रभु जी मुझे वरदान दो…….
६. मेरे दिल में प्यार की प्यास है।
तेरा आसरा मेरी आस है।
तेरे ओम् के प्रिय नाम को पल पल ‘पथिक’ जपता रहूँ।
प्रभु जी मुझे वरदान दो………..










