नेकियाँ कमाना
(तर्ज – दिल का खिलौना हाये टूट गया)
- नेकियाँ कमाना काहे छोड़ दिया।
बुरी आदतों से नाता जोड़ दिया।
नेकियाँ कमाना काहे………..
१. तुझे परमात्मा ने आदमी बनाया।
वेद के विचार दे के सोचना सिखाया।
पापों को छोड़ना था पुण्यों को जोड़ना था।
बिना सोच के ही मौका हाथ से गँवाया।
ख़ुद ही नसीबा तूने फोड़ दिया।
नेकियाँ कमाना काहे……….
२. ज़िन्दगी गुज़ार के तो जाना पड़ेगा।
दूसरा ठिकाना कोई बनाना पड़ेगा।
सामने सवाल आया। और यह ख़याल आया।
कभी न कभी तो डेरा उठाना पड़ेगा।
प्रभु प्रेरणा को झकझोड़ दिया।
नेकियाँ कमाना काहे……….
३. अन्धेरी सी कोठड़ी में रो रो पुकारा।
कर्म भूल के न ऐसे करूँगा दोबारा ।
प्रभु तेरा नाम लूँगा। तन से शुभ काम लूँगा।
ज़माने में आ के वादा भूल गया सारा ।
काँच का खिलौना जैसे तोड़ दिया।
नेकियाँ कमाना काहे……….
४. भजन के बगैर सारी ज़िन्दगी बिताई।
भले काम की है तेरी कौन सी कमाई।
भूखा जो दर पे आये। भूखा ही लौट जाये।
कान से सुना न दिया आँख से दिखाई।
‘पथिक’ बेचारा ख़ाली मोड़ दिया।
नेकियाँ कमाना काहे










